उदयगिरि की गुफा 5 में वराह अलग प्रतिमा नहीं हैं। विशाल शरीर दीवार पर छाया है; सामने छोटी धरती-देवी और चारों ओर दूसरे पात्र हैं। आकार का फर्क कथा का केंद्र तय करता है।

पुरातत्व सर्वेक्षण के अभिलेख में वराह के गले से घुटने तक जाती कमल-माला दर्ज है। नीचे लहरदार बनावट और समुद्र का मानवीकृत रूप धरती को जल से उठाने का क्षण रचते हैं।

देव, ऋषि और मानव मुख्य पात्र की ओर मुड़ते हैं। ब्रिटिश लाइब्रेरी की प्रविष्टि भी इसे गुफा 5 में भू-देवी को बचाते विष्णु-वराह का शैल-उत्कीर्णन पहचानती है।

पास की गुफा का अभिलेख 401–402 ईस्वी का काल-संदर्भ देता है। वह हर आकृति की तारीख नहीं बताता, मगर स्थल को ठोस समय में रखता है। यहां आकार, दिशा और भीड़ मिलकर कथा बनाते हैं।

मुख्य बातें

  • वराह का बड़ा आकार आसपास के पात्रों से स्पष्ट रूप से अलग है।
  • कमल-माला, जल और छोटी आकृतियां कथा को दीवार भर फैलाती हैं।
  • पास का अभिलेख 401–402 ईस्वी का संदर्भ देता है।

स्रोत और संदर्भ

  1. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण / IGNCA अभिलेख · Udayagiri and its caves ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  2. ब्रिटिश लाइब्रेरी एशिया-पैसिफिक अभिलेख · Rock sculpture of Vishnu as Varaha, Udayagiri ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 16 सितंबर 2026।

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