किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग एवं जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के संयुक्त दल ने कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देशानुसार विकासखंड मझौली और सिहोरा के ग्राम कैलवास, गांधीग्राम, देवनगर, घुटना एवं खजुरी पहुंचकर धान की फसल में लगने वाले कीट एवं रोगों पर नियंत्रण के लिए किसानों को उपयुक्त सलाह दी। संयुक्त दल में कृषि वैज्ञानिक एवं कृषि अधिकारी शामिल थे।
संयुक्त दल ने इन गांवों में किसानों की मौजूदगी में धान के खेतों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बैक्टीरियल ब्लाइट (जीवाणु झुलसा) एवं लीफ फोल्डर (पत्ती मोड़क कीट) का प्रकोप पाया गया। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल सुरक्षा के संबंध में आवश्यक तकनीकी सुझाव दिए। उन्होंने जीवाणु झुलसा (बैक्टीरियल ब्लाइट) का प्रकोप अधिक होने पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी।
कृषि वैज्ञानिकों और कृषि अधिकारियों की टीम ने किसानों को खेतों का नियमित निरीक्षण करने खेत में अनावश्यक रूप से पानी भरकर नहीं रखने तथा नाइट्रोजन प्रबंधन के तहत यूरिया का संतुलित उपयोग करने की भी सलाह दी। किसानों को धान की फसल में पाए गए रोग और कीटों के नियंत्रण के संबंध में आवश्यक तकनीकी जानकारी भी दी गई।
धान की फसल में पत्ती मोड़क कीट के नियंत्रण के लिए प्रारंभिक अवस्था में मुड़ी हुई पत्तियों को एकत्र कर नष्ट करने तथा अधिक प्रकोप होने पर क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी 0.3 मिलीलीटर प्रति लीटर अथवा एमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी 0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने की सलाह किसानों को दी गई।
किसानों को कीटनाशकों और फफूंदनाशकों का छिड़काव प्रातःकाल या सायंकाल के समय करने तथा आवश्यकता होने पर 10 से 12 दिन के अंतराल के बाद छिड़काव दोहराने का सुझाव दिया गया।
संयुक्त दल में कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार गुप्ता, श्रीमती मनीषा पटेल, अनुविभागीय अधिकारी कृषि सिहोरा तथा कृषि विस्तार अधिकारी प्राची बर्मन एवं जया पालीवाल शामिल थे।





